कोरोना काल मे सूचना निदेशालय मे हुआ बडा घोटाला/चहेते न्यूज पोर्टलो को गुपचुप बांटे गए आधा करोड़ के विज्ञापन

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(सुरेन्द्र अग्रवाल द्वारा)

देहरादून (उत्तराखंड)- देश की.आजादी के समय से ही.देश व.प्रदेशों में सरकारों के गठन के लिए लोकतांत्रिक प्रणाली लागू है, जिसमें जनता द्वारा ही अपने बीच के लोगों को अपना प्रतिनिधि चुन कर संसद व विधानसभा में भेजा जाता है।इन.जनप्रतिनिधियों द्वारा ही सरकार का गठन किया जाता है। इनके द्वारा लिए गए फैसलों का.मुख्य सचिव से लेकर सभी अधिकारीगण अनुपालन करतें हैं, इसीलिए चाहे कितने ही उच्च पद पर कोई आसीन हो,उस अधिकारी को कार्मिक विभाग की नियमावली के अनुसार “लोकसेवक”,माना जाता है। परन्तु उत्तराखंड का सूचना विभाग एक मात्र ऐसा विभाग है,जहाँ पर पूरी तरह स्वेच्छाचारिता. का माहौल व्याप्त है।
1-सूचना विभाग मे कुछ अधिकारीगण खुद को लोकसेवक नहीं वरन.पत्रकारों का भाग्यविधाता मानते है–उत्तराखंड के पत्रकारों द्वारा जब जब विज्ञापन मे भेदभाव से सम्बंधित कोई मुद्दा उठाया जाता है, ,तो बगैर डीपीसी हुए उपनिदेशक बने एक महोदय की जबान पत्रकारों को गरियाने वाली स्टाईल मे आ जाती है।.इनका कहना है कि हमारी मर्जी है.किसको और कितने पैसों.का विज्ञापन देना है।
बगैर डीपीसी के बने उपनिदेशक महोदय-सूर्यजागरण का जवाब भी सूने।.सूचना विभाग में विज्ञापन मद.का जो भी पैसा है, उसे “लोक धन” कहा जाता है। जिसका वितरण औचित्यपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। जहां तक उनकी मर्जी की बात है यदि अपनी सेलरी या पुरखों की जायदाद से किसी को विज्ञापन दे रहे हो, उसे जरूर अपनी मर्जी से बांट सकते हो।परन्तु.लोक धन से विज्ञापनों का वितरण सही तरीक़े से करने हेतु बाध्य है।
2- कोरोना काल मे आठ न्यूज पोर्टलों को पांच पांच लाख यानि चालीस लाख की भारी भरकम धनराशि के विज्ञापनों को दिए जाने का हुआ है बडा घोटाला- उत्तराखंड राज्य वर्तमान में कोरोना संकट की विभीषिका से.जूझ रहा है।इस दौरान राज्य सरकार द्वारा बेहद सीमित संसाधनों मे भी कमजोर वर्गों को अधिकतम राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
परन्तु उत्तराखंड का सूचना विभाग कोरोना संकट के दौर में भी.अपना मनमानी कार्यप्रणाली बदलने को तैयार नहीं है। लगभग ढाई माह के कोरोना काल मे सामान्य पत्रकार को मात्र 4000 रू एक विज्ञापन दिया गया। परन्तु अपनी ऊची पहुंच रखने वाले आठ पत्रकारों के न्यूज पोर्टलों को पांच पांच लाख का यानी चालीस लाख का असमान्य विज्ञापन कोरोना के घनघोर संकट के दौरान जारी कर दिया गया।
जिम्मेदार सूत्रों ने इसे बडा घोटाला बताया है, उनकी बातों पर यदि भरोसा किया जाए, तो इस बडे घोटाले में सभी विज्ञापन फिफ्टी फिफ्टी के फार्मूले पर जारी हुए हैं.।
3-मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की सारी मेहनत पर पानी फेरने मे जुटा है सूचना विभाग -,कोरोना संकट से उत्तराखंड बहुत बहादुरी से मुकाबला कर रहा है। 470 की.संख्या तक पहुंच चुके पोजीटिव केसो और लाखों प्रवासियों के लिए क्वारटांइन की व्यवस्था में शासन, प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन तक जी जान से जुटा है। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को भी जिले जिले पहुंचे कर.समीक्षा करने को मजबूर होना पड रहा है।
. ऐसे घनघोर आपदा काल मे भी सूचना विभाग द्वारा कुछ चहेतों पर विशेषांक के रुप मे लाखो की धनराशि लुटाकर यह साबित कर दिया है।.कि चाहे आपदा के लिए धन जुटाने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री को.आगे आना पड रहा हो, आए.दिन संस्थाओं से लेकर उद्यमी तक मुख्यमंत्री राहत कोष में धनराशि दान दे रहे हैं ताकि सरकार सभी जरूरी प्रबंध कर सके, परन्तु सूचना विभाग अपने तौर तरीक़े नहीं बदल.सकता है।
4-उत्तराखंड के हितैषी तो कतई नहीं है ऐसे लोग – कोरोना संकट के दौरान पांच पांच लाख का पैकेज लेने वाले पोर्टल संचालक हो या इन विशेषांकों को जारी करने से जुड़े सूचना विभाग के लोकसेवक.हो, मन तो इन सभी को बहुत कुछ कहने का होता है लेकिन लेखक की मर्यादा है इस नाते यह न्यूज पोर्टल का मानना. है. कि.इस मैटर से जुड़े सभी पत्रकार व.सभी.लोकसेवक “उत्तराखंड के हितैषी” कतई नहीं है।
5-भाजपा,कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों को उठानी होगी ऐसी अनियमिताओं पर मुखर आवाज– इस आलेख के लेखक को “अटल-आडवाणी” काल.का एक स्लोगन याद है- “सबको परखा बारबार -हमको परखो एक बार'”।
भाजपा के इस स्लोगन को सही साबित करने की सर्वाधिक जिम्मेदारी प्रदेश में सत्तारूढ़ होने के नाते भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर भगत सहित सभी सांसदों, विधायकों, वरिष्ठ नेताओं की बनती है। उनका फर्ज बनता है कि कोरोना काल मे लाखों की बन्दरबांट वाले ऐसे विज्ञापनादेशो.को तत्काल निरस्त कराएं और इसे जारी करने वाले सभी अधिकारियों को निलम्बित कराए।
..कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता गण यदि अपने राज्य के प्रति थोड़ी भी जिम्मेदारी समझते हैं तो तत्काल कोरोना काल मे हुए इस विज्ञापन घोटाले पर प्रभावी कदम उठाएं।

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