भुजरिया का आदान प्रदान न कर सोशल डिस्टेंसिग के साथ मनाए श्रावणी पर्व -एम.एल.कन्नौजिया, क्षेत्रीय महामंत्री, भाजपा,अवध क्षेत्र (अनु.मोर्चा)

उत्तरप्रदेश उत्तराखण्ड

लखनऊ/उत्तर प्रदेश -श्रावण मास की पूर्णिमा पर सदियों से चली आ रही भुजरिया विसर्जन एवं एक दूसरे को भुजरिया देकर मेल मिलाप करने वाली परंपरा का स्थगित कर दूर से ही सोछशल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए अभिवादन करके निर्वहन करें।

उक्त आशय की अपील एम.एल.कन्नौजिया क्षेत्रीय महामंत्री, भाजपा, अवध क्षेत्र (अनुसूचित मोर्चा) ने करते हुए कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना चलते-चलते हमारे नजदीक के गांव एवं नगर तक आ पहुंची है जो भावी खतरे का संकेत है अब यह विश्वास पूर्वक नहीं कहा जा सकता है कि हमारे आसपास बैठने-उठने वाला कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित नहीं है संभव है कि हमारे बीच में कई लोग कोरोना संक्रमित हो इसलिए अब सावधानी बरतते हुए हम सबको सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर इस महामारी से बचना है ।

प्रति वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा परंपरागत भुजरिया आदान प्रदान की परम्परा में आंशिक संशोधन करना होगा । प्राचीन परंपरा अनुसार भुजरिया विसर्जन के बाद हम लोग आपस में भुजरियों को एक दूसरे को आदान-प्रदान करके अपनों से बड़ों के पैर छूने एवं अपने मित्रों को स्नेह युक्त आलिंगन करते हैं। इस दौरान हम 2 घंटों में लगभग एक हजार से तीन हजार लोगों के संपर्क में आते हैं यदि इन लोगों में कोई एक व्यक्ति भी संक्रमित हुआ तो हमारा पूरा गांव और पूरा क्षेत्र कोरोना संक्रमित होने की संभावना है अतः जनजीवन व स्वास्थ्य रक्षा हेतु हम लोग प्रतिवर्ष की भांति भुजरिया विसर्जन के बाद वहां पर आए हुए लोगों को बगैर भुजरिया दिए दूर से ही प्रणाम , अभिवादन कर प्राचीन परंपरा का सांकेतिक निर्वहन करें।

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