श्रावणी पर भुजरिया आदान-प्रदान न कर दूर से ही करें सांकेतिक अभिवादन- विजय द्विवेदी, मन्डल महामंत्री भाजपा

उत्तरप्रदेश उत्तराखण्ड

जगम्मनपुर, जालौन । श्रावण मास की पूर्णिमा पर सदियों से चली आ रही भुजरिया विसर्जन एवं एक दूसरे को भुजरिया देकर मेल मिलाप करने वाली परंपरा को स्थगित कर दूर से ही सांकेतिक अभिवादन करके कोरोना महामारी से बचें ।

उक्त आशय की अपील क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी विजय द्विवेदी मंडल महामंत्री भाजपा ने करते हुए कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना चलते-चलते हमारे नजदीक के गांव एवं नगर तक आ पहुंची है जो भावी खतरे का संकेत है अब यह विश्वास पूर्वक नहीं कहा जा सकता है कि हमारे आसपास बैठने-उठने वाला कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित नहीं है संभव है कि हमारे बीच में कई लोग कोरोना संक्रमित हो इसलिए अब सावधानी बरतते हुए हम सबको सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर इस महामारी से बचना है । प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा पर बुंदेलखंड एवं आसपास के इलाके में प्रसिद्ध एवं परंपरागत भुजरिया मेला परम्परा में आंशिक संशोधन करना होगा ।

प्राचीन परंपरा अनुसार भुजरिया विसर्जन के बाद हम लोग आपस में भुजरियों को एक दूसरे को आदान-प्रदान करके अपनों से बड़ों के पैर छूने एवं अपने मित्रों को स्नेह युक्त आलिंगन करते हैं। इस दौरान हम 2 घंटों में लगभग एक हजार से तीन हजार लोगों के संपर्क में आते हैं यदि इन लोगों में कोई एक व्यक्ति भी संक्रमित हुआ तो हमारा पूरा गांव और पूरा क्षेत्र कोरोना संक्रमित होने की संभावना है अतः जनजीवन व स्वास्थ्य रक्षा हेतु हम लोग प्रतिवर्ष की भांति भुजरिया विसर्जन के बाद वहां पर आए हुए लोगों को बगैर भुजरिया दिए दूर से ही प्रणाम , अभिवादन कर प्राचीन परंपरा का सांकेतिक निर्वहन करें।

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