यूनियन बैंक- “लोन लेने वालों को पुचकार-डिपोजीटर को दुत्कार’/देहरादून की सर्वे आफ इन्डिया शाखा ने अपनाया नया स्लोगन

उत्तरप्रदेश उत्तराखण्ड

(सुरेन्द्र अग्रवाल द्वारा)
देहरादून (उत्तराखंड)– “अच्छे लोग-अच्छा बैंक” इस स्लोगन को कुछ समय पूर्व यूनियन बैंक आफ इंडिया की अनेक शाखाओं के बाहर देखा जाता था परंतु प्रतीत होता है कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून मे स्थित “सर्वे आफ इंडिया” शाखा ने इस नारे को भुलाकर एक नया नारा अपना लिया है,उसका नया नारा है “लोन लेने वाले को पुचकार-डिपोजीटर को दुत्कार”।
*शाखा प्रबंधक के बदलने भर से बदल गई कार्यप्रणाली- किसी भी कार्यालय/शाखा का कार्यालयाध्यक्ष बदल जाने भर से उसकी कार्यप्रणाली मे किस तरह से बदलाव आ जाता है,यह पिछले दिनों यूनियन बैंक आफ इंडिया की सर्वे आफ इन्डिया, देहरादून मे देखने को मिला। जहां पर तीन वर्षों तक शाखा प्रबंधक के रूप में निशान्त मिश्रा पदस्थ रहे हैं, जिनके कुशल निर्देशन में कोरोनाकाल मे लौकडाउन के दौरान बैंक के पूरे स्टाफ ने मनोयोगपूर्वक कार्य किया। पूरे कोरोनाकाल मे मुख्य द्वार पर सैनिटाइजर से लेकर थर्मल स्क्रीनिंग तक की व्यवस्था की गई। सामान्य ग्राहकों तक को कोरोनाकाल मे कोई असुविधा नहीं हुई।
परन्तु लगभग डेढ माह पूर्व इस शाखा में शाखा प्रबंधक के रूप में “प्रिया खरे” का पदार्पण हुआ। प्रारम्भिक दिनो मे प्रिया खरे का व्यवहार बेहद अच्छा रहा लेकिन कुछ दिनों में उन्हें अपने पद का ऐसा अंहकार सवार हुआ कि उन पर गरिमाहीन आचरण तक करने के आरोप लगने शुरू हो गए।
*डिपोजीटर व पुराने खाताधारक ने लगाया अभद्रता का आरोप– यूनियन बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक को भेजे गए शिकायतीपत्र मे एक खाताधारक द्वारा कहा गया है कि उनको अपने करेंट खाते के सम्बन्ध मे आवश्यक जानकारी चाहिए थी,इस हेतु वह बैंक शाखा में 26/08 ,28/08 ,29/08 व 31/08/20 मे गए। हर बार शाखा प्रबंधक के कक्ष मे रखी दोनों कुर्सी भरी मिलीं। पूछने पर ज्ञात हुआ कि लोन लेने वाले लोग बैठे हुए हैं।
शिकायतीपत्र मे बताया गया है कि दिनांक 28/08 को वह शाखा प्रबंधक के केबिन में गया। प्रिया खरे ने उससे कहा कि केबिन के बाहर इन्तजार करो। बुलाऊगी तब आना। जब बीस मिनट से अधिक समय तक नहीं बुलाया, तब वह वापस लौट आए।
शिकायतीपत्र के अनुसार खाताधारक अगले दिन 29/08 को पुनः बैंक गया। केबिन की दोनों कुर्सी उस समय भी भरीं थी, वह फिर केबिन मे चला गया। इस पर प्रिया खरे अभद्रता पर उतर आईं, उन्होंने खाताधारक से कहा “इतना भी मैनर नहीं है, जब दोनों कुर्सी भरीं हैं, फिर भी बारबार केबिन मे आ जाते हो,बाहर जाओ,इन्तजार करो”। काफी देर इन्तजार के बाद भी न बुलाए जाने पर वह फिर वापस लौट गया। इसके बाद 31/08 को वह फिर बैंक गया, शाखा प्रबंधक के केबिन की दोनों कुर्सी फिर भरी मिली। वह फिर वापस लौट गया। हर बार लोन लेने वाले ही मिले।
*एजीएम दिलीप मिश्रा ने भी खाताधारक की शिकायत को नजरअंदाज कर दिया –58 वर्षीय खाताधारक जोकि पेशे से पत्रकार हैं, ने युवा उम्र की शाखा प्रबंधक द्वारा लगातार उपेक्षित किए जाने व अपमानित किए जाने से आहत होकर यूनियन बैंक के एजीएम दिलीप मिश्रा को 01/09 को फोन पर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया तो एजीएम ने आश्वस्त किया कि यूनियन बैंक में खाताधारकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि कुछ ही देर मे प्रिया खरे खुद आपको फोन करके कार्य पूछेगी और प्राथमिकता पर आपका कार्य कराएगी।
परन्तु जब सर्वे आफ इन्डिया शाखा की ओर से न किसी का कोई फोन आया, न ही किसी अन्य तरह से कोई रिस्पांस मिला तब खाताधारक ने 02/09 की अपरान्ह मे वाट्सएप भेजकर एजीएम दिलीप मिश्रा से अपने प्रकरण मे जानकारी मांगी गई तो उन्होंने मैसेज “रीड” तो कर लिया लेकिन किसी प्रकार का कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया गया। इस प्रकार एजीएम ने भी अपने दायित्वों का निर्बहन न करते हुए खामोश रहते हुए प्रकारांतर से प्रिया खरे को ही संरक्षण दिया।
*लोन लेने वालों से क्यों भरा रहता है शाखा प्रबंधक का केबिन- शाखा प्रबंधक का दायित्व बनता है कि सामान्य ग्राहकों, डिपोजीटरो, लोन लेने वालों इत्यादि सभी प्रकार के बैंक ग्राहकों से समन्वय स्थापित कर सभी की समस्याएं सुनकर उनका निराकरण करे। परन्तु जिस प्रकार से प्रिया खरे के कार्यकाल मे लोन लेने वालों का ही केबिन पर कब्जा बना रहता है। इस स्थिति से साफ इशारा मिलता है कि कहीं लोन की आड़ मे करप्शन तो नहीं किया जा रहा है। खैर इस संदर्भ में भविष्य मे पृथक से आलेख लिखा जाएगा।
*डिपोजीटर व पुराना बैंक ग्राहक है शिकायतकर्ता- ज्ञातव्य है कि शिकायतकर्ता बैंक का लगभग 15 वर्ष पुराना ग्राहक है और डिपोजीटर है। इसीलिए सर्वे आफ इन्डिया शाखा पर यह स्लोगन बिल्कुल सटीक बैठता है कि “लोन लेने वालों को पुचकार -डिपोजीटर को दुत्कार”।

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