यूनियन बैंक के एजीएम दिलीप मिश्रा पर लगे अभद्रता की आरोपी प्रिया खरे को अनुचित संरक्षण के आरोप/ बैंक से डिपोजिट हटाने की दी गई चेतावनी

उत्तरप्रदेश उत्तराखण्ड

देहरादून (उत्तराखंड)- भारत सरकार जब भी एल.आई.सी की भांति किसी संस्थान के प्राइवेटाइजेशन की बात करती है तो संस्थान के स्टाफ को यह बेहद नागवार लगता है और वे आंदोलन तक करने लगते हैं, परन्तु जब सरकारी संस्थानों में कार्यरत किसी स्टाफ पर जनता के साथ बदसलूकी का आरोप लगता है तो ऐसे संस्थानों के बडे अधिकारी भी शिकायतकर्ता को न्याय देने के स्थान पर आरोपी को ही संरक्षण देने लगते हैं।

इस प्रकार का एक मामला, देहरादून की यूनियन बैंक आफ इंडिया का सामने आया है, जहां पर एजीएम दिलीप मिश्रा पर आरोपी अधीनस्थ को अनुचित संरक्षण दिए जाने का आरोप लिखित रूप में लगाया गया है।
एक सितंबर को फोन पर एवं तीन सितंबर को लिखित में दी गई थी शिकायत :- सर्वे आफ इंडिया, देहरादून शाखा की मैनेजर सुश्री प्रिया खरे द्वारा अभद्रता किए जाने की शिकायत एक सितंबर को एजीएम दिलीप मिश्रा मोबाइल फोन पर, दो सितंबर को वाट्सएप पर, तदुपरांत तीन सितंबर को लिखित मे की गई थी। परन्तु एजीएम द्वारा अभद्रता की आरोपी प्रिया खरे के विरुद्ध कोई कार्यवाही न कर अनुचित संरक्षण प्रदान किया गया।
यूनियन बैंक से डिपोजिट हटाने की दी चेतावनी :– पुराने ग्राहक होने के बावजूद शाखा प्रबंधक द्वारा अभद्रता किए जाने एवं एजीएम द्वारा कोई कार्यवाही न कर संरक्षण दिए जाने से क्षुब्ध होकर शिकायतकर्ता ने अपने कुछ डिपोजिट सर्वे आफ इंडिया शाखा से हटाकर लाडपुर स्थित शाखा में ट्रांसफर करने के पत्र दे दिए हैं। साथ ही डीजीएम को भेजे पत्र मे साफ तौर पर चेताया गया है कि अभद्रता की आरोपी प्रिया खरे के विरुद्ध प्रभावी दन्डात्मक कार्यवाही न की गई तो डिपोजिटो को यूनियन बैंक से हटाने को मजबूर हो जाऊंगा।

ज्ञातव्य है कि एफडीआर व अन्य स्कीमों मे जमा धनराशि को ही दो से तीन फीसदी ऊची ब्याज दरो पर कर्ज रुप मे देकर डिपोजीटर की धनराशि पर बैंक कमाई करता है। इसी कमाई से एजीएम हो या शाखा प्रबंधक सभी तनख्वाह पाते हैं।
शिकायत रिसीव करने मे छूटा पसीना :- अभद्रता की आरोपी को संरक्षण देने के कारण डिपोजिट हटाने का डीजीएम को सम्बोधित एक शिकायतीपत्र आज क्षेत्रीय कार्यालय में दिया गया। गेट पर मौजूद गार्ड जब पत्र को रिसीव कराने अंदर गया तो पत्र रिसीव करने में स्टाफ को पसीना आ गया। करीब बीस-पच्चीस मिनट तक उच्च स्तर पर गहन विचार मंथन के बाद पत्र रिसीव किया गया।
अभद्रता प्रकरण से हो रही है यूनियन बैंक की बदनामी :- जिस यूनियन बैंक का अधिकांश स्टाफ बेहद मिलनसार व कर्तव्य परायण है,उस बैंक मे शाखा प्रबंधक द्वारा पुराने ग्राहक के साथ अभद्रता किए जाने की चर्चा जैसे जैसे आमजन मे फैल रही है। वैसे वैसे आमजन के बीच बैंक की साख बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
बैंक के हैडआफिस तक भेजी जाएगी शिकायतें :- शिकायतकर्ता के अनुसार यूनियन बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय अभद्रता की शिकायत का संज्ञान लेकर आरोपी को ही संरक्षण देने मे जुटा है, इसलिए अभद्रता प्रकरण की शिकायत बैंक के हैडआफिस भी भेजी जाएगी।

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