प्रियन्ता खरे को सर्वे आफ इन्डिया शाखा से हटाए जाने की प्रबल संभावना/एजीएम दिलीप मिश्रा ने बनाया अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न

उत्तरप्रदेश उत्तराखण्ड

देहरादून- यूनियन बैंक के एक पुराने ग्राहक से शाखा प्रबंधक प्रियन्ता खरे द्वारा अभद्रता किए जाने के प्रकरण मे क्षेत्रीय कार्यालय में मतभेद पैदा हो गए हैं।
एजीएम दिलीप मिश्रा ने प्रियन्ता खरे को शाखा प्रबंधक से  हटाने को बनाया अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न- क्षेत्रीय कार्यालय के विश्वसनीय सूत्रों ने सूर्यजागरण को बताया कि सर्वे आफ इंडिया की शाखा प्रबंधक प्रियन्ता खरे द्वारा पुराने ग्राहक के साथ अभद्रता किए जाने की शिकायत को क्षेत्रीय कार्यालय में बहुत गम्भीरता से लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार क्षेत्रीय कार्यालय के कुछ अधिकारियों का मानना है कि सर्वे आफ इंडिया जैसी अच्छी ब्रांच को एक अनुभवहीन को सौंपा ही नहीं जाना चाहिए था लेकिन लिखित शिकायत के बाद अब तत्काल प्रियन्ता खरे को शाखा प्रबंधक से हटा देना चाहिए। परन्तु एजीएम दिलीप मिश्रा ने प्रियन्ता खरे को हटाने के मामले को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।
क्षेत्रीय कार्यालय में मतभेद के चलते नहीं हो सकी अब तक कोई कार्यवाही:- यूनियन बैंक सदैव से ही ग्राहकों से सम्मानजनक व्यवहार को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहा है। इसलिए तीन सितंबर को प्राप्त लिखित शिकायत पर सख्त कार्यवाही किया जाना अपेक्षित रहा है। परन्तु क्षेत्रीय कार्यालय में इस संदर्भ में मतभेद के कारण ही एक सप्ताह बाद अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की जा सकी है।
एजीएम दिलीप मिश्रा की पैरवी से ही प्रियन्ता खरे को मिली थी सर्वे आफ इंडिया जैसी शाखा की कमान:- प्रियन्ता खरे की पूर्व मे पोस्टिंग एमकेपी स्कूल परिसर में स्थित सर्विस शाखा में प्रबंधक के तौर पर रही है,जहां पर ग्राहकों से किसी प्रकार का कोई संवाद रहता है, केवल चैकों की क्लियरिंग का इन्टरनल कार्य होता है।पहली बार ही उन्हें ग्राहकों से सीधे सम्पर्क वाली शाखा की कमान मिली है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार 150 करोड से अधिक डिपोजिट वाली सर्वे आफ इन्डिया जैसी प्रतिष्ठित शाखा के मैनेजर की कुर्सी प्रियन्ता खरे को दिलाने के लिए एजीएम दिलीप मिश्रा ने जबरदस्त पैरवी की थी।
चीफ मैनेजर भोपाल सिंह ने शिकायतकर्ता को किया फोन/शिकायत पर साधी चुप्पी:- अभद्रता की लिखित शिकायत के संदर्भ में बीती 8 सितंबर को शाम 6-38 PM पर क्षेत्रीय कार्यालय से चीफ मैनेजर रैंक के अधिकारी भोपाल सिंह ने शिकायतकर्ता को फोन कर प्रकरण के पटाक्षेप करने को कहा परन्तु उनसे जब यह जानकारी चाही गई कि तीन सितंबर को की गई शिकायत मे अब तक क्या कार्यवाही की गई तो वह खामोश हो गए।

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